जल संरक्षण पर कार्यशाला एवं बहुरूपी नाट्य प्रस्तुति

जल संरक्षण पर कार्यशाला एवं बहुरूपी नाट्य प्रस्तुति

सरकार और जनसहयोग के संयुक्त प्रयास से दूर होगा जल संकट – प्रो. भारती

नदी मित्र वर्धा इकाई तथा बहुरूपी कला संगठन, केलझर द्वारा बहुरूपी बस्ती, केलझर में एक दिवसीय जल जागरण शिविर का आयोजन किया गया । शिविर में महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर तथा नदी विशेषज्ञ डॉ. ओम प्रकाश भारती ने उपस्थित गाँव वासियों को विदर्भ में जल संकट के कारण, जल संरक्षण के उपाय तथा सामाजिक सहभागिता पर प्रकाश डाला । डॉ. भारती ने कहा आज विदर्भ जल संकट से भयावह रूप से जूझ रहा है । तीस-चालीस प्रतिशत लोग शुद्ध पेय जल के संकट से जूझ रहे हैं ।शहरीकरण और औद्योगिक गतिविधियों से निकलने वाला कचरा और सीवेज विदर्भ की नदियों में मिल रहा है।

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कृषि और घरेलू उपयोग के लिए धरती से अत्यधिक पानी निकाला जा रहा है। अवैध रेत खनन से नदियों का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो रहा है। अनियमित मानसून और सूखे की स्थिति ने जल स्तर को कम किया है। अतिक्रमण: नदी तटों पर अतिक्रमण से इनका प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र नष्ट हो रहा है। विदर्भ क्षेत्र मुख्य रूप से अपनी कृषि-प्रधान अर्थव्यवस्था के लिए जाना जाता है, लेकिन अनियमित मानसून, भूजल का अत्यधिक दोहन, और अपर्याप्त जल प्रबंधन ने यहाँ जल संकट को गंभीर बना दिया है। कई बार कम वर्षा के कारण जलाशय और नदियाँ सूख जाती हैं, जिससे सिंचाई और पीने के पानी की कमी हो जाती है। यहाँ के किसान धान और कपास जैसी जल-गहन फसलों पर निर्भर हैं, जिसके लिए भूजल का बड़े पैमाने पर दोहन किया जाता है। इससे भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। जल संकट ने गरीबी, पलायन और किसानों की आत्महत्या जैसी समस्याओं को बढ़ावा दिया है।

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समय रहते हमें जल संकट से निपटने का उपाय ढूँढना होगा । कृषि क्षेत्र में ड्रिप सिंचाई को बढ़ाबा देना होगा । ड्रिप सिंचाई से हम पानी को छिद्र युक्त पाईप से पेड़ –पोधौं तक पहुंचाते हैं । इससे कम पानी से अधिक सिंचाई की जा सकती है । पानी मित्र फसल यथा; कपास और संतरा उगाने को प्रोत्साहित करना होगा । ‘कैच द रेन’ यानि वर्षा जल को रोकने का सामूहिक प्रयास करना होगा । भूजल जल को रिचार्ज यानि शुद्ध वर्षा जल को धरती के अन्दर पहुचना होगा। पानी के दुरउपयोग से बचाना होगा। जब तक मानसून नहीं आ जाए तब तक पांच सितारा होटलों के तरण ताल तथा वाटर पार्क को सीमित पानी का उपयोग करना चाहिए । विदर्भ में इस समय दो सो से अधिक तरण-ताल है । जल सबका है, यह सबको मिले। हमें सरकार और जनसहयोग के संयुक्त प्रयास से दूर जल संकट को दूर करने की पहल करनी होगी ।

शिविर के दौरान डॉ. ओम प्रकाश भारती लिखित नाटक ‘सबको मिले पानी’ की प्रस्तुति बहुरूपी बाल कलाकारों ने की । नाटक का निर्देशन शाधार्थी राहुल यादव ने की । नाटक में दिखाया गया कि किस तरह जंगल के राजा शेर पानी को नष्ट करते हैं और बंदरों ने दुष्ट राजा को अपने तरकीब से छक्के छुड़ाए और पानी को नष्ट करने से रोका । कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ बहुरूपी कलाकार ताराचन्द महुरे ने किया।

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