खैरागढ़ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने कलेक्टर पर लगाया गाली-गलौज और धमकी देने का आरोप

छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ स्थित इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। विश्वविद्यालय के लोक संगीत एवं कला संकाय विभाग के डीन और थियेटर विभाग के अध्यक्ष डॉ. योगेंद्र चौबे ने खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के कलेक्टर चंद्रकांत वर्मा पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

डॉ. चौबे का दावा है कि कलेक्टर ने उन्हें सार्वजनिक रूप से गालियां दीं, अपमानित किया और विश्वविद्यालय को निशाना बनाने की धमकी दी। यह घटना कथित तौर पर 21 से 23 मार्च के बीच आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम “ऑक्टेव-2025” के दौरान हुई।डॉ. योगेंद्र चौबे ने बताया कि वे कार्यक्रम के दौरान मंच व्यवस्था का निरीक्षण कर रहे थे, तभी उन्हें फोन पर सूचना मिली कि कुलपति ने उन्हें बुलाया है।

जब उन्होंने इसकी पुष्टि के लिए पूछताछ की, तो जवाब मिला कि कुलपति ने उन्हें नहीं बुलाया। इसी बीच कलेक्टर चंद्रकांत वर्मा ने हस्तक्षेप करते हुए कहा, “मैंने तुम्हें बुलाया है, बाहर मेरा इंतजार करो।” इसके बाद बाहर निकलते ही कलेक्टर ने उनके साथ अभद्र व्यवहार शुरू कर दिया। डॉ. चौबे के मुताबिक, कलेक्टर ने गाली-गलौज की और धमकी भरे लहजे में कहा, “तुझे तो देख लूंगा।” इतना ही नहीं, कलेक्टर ने विश्वविद्यालय को भी निशाना बनाते हुए कहा, “देखता हूं तुम्हारे विश्वविद्यालय को, परिसर की एक-एक जमीन नपवाऊंगा।” इसके बाद कलेक्टर अपनी गाड़ी में बैठकर चले गए।

डॉ. चौबे ने इस घटना को लेकर विश्वविद्यालय के कुलपति से शिकायत की है। उन्होंने इसे न केवल अपनी व्यक्तिगत गरिमा पर ठेस पहुंचना बताया, बल्कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता और सम्मान पर भी हमला बताया है। उन्होंने कहा, “एक जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी का इस तरह का व्यवहार निंदनीय है। यह घटना मेरे लिए अपमानजनक होने के साथ-साथ पूरे विश्वविद्यालय समुदाय के लिए चिंता का विषय है।” इस मामले में अभी तक कलेक्टर चंद्रकांत वर्मा की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस घटना पर संज्ञान लेते हुए जांच की बात कही है।

सूत्रों के अनुसार, यह मामला अब उच्च अधिकारियों तक पहुंच सकता है, क्योंकि इसमें एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और विश्वविद्यालय के बीच तनाव की स्थिति पैदा हो गई है।बता दें कि इस घटना ने न केवल आयोजन की गरिमा को प्रभावित किया है, बल्कि विश्वविद्यालय और जिला प्रशासन के बीच संबंधों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और छात्रों के बीच इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

फिलहाल, इस मामले में आगे की कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।

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